बरखा की पहली पहली फूहार हो
मनभावन बासंती बयार हो
कोयल की कूहु कूहु
पपीहा की राम प्यासो
स्वाँती नक्छत्र की पहली मादक बूँद
कवि हर्दय का कुदरती सिंगार हो तुम
कृतक अँजान डगर की पहली मोहब्बत दिली एतबार हो तुम
चाँदनी के शबनमी मोतियों का
नवलखा मुक्ताहार हो तुम
सूरज की नव लालिमा कुदरत का प्यार हो तुम
मेरी दिली ख्वाहिश यार दिली एतबार हो तुम
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Sunday, 19 June 2016
बरखा की पहली फूहार
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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