Sunday, 19 June 2016

बरखा की पहली फूहार

बरखा की पहली पहली फूहार हो
मनभावन बासंती बयार हो
कोयल की कूहु कूहु
पपीहा की राम प्यासो
स्वाँती नक्छत्र की पहली मादक बूँद
कवि हर्दय का कुदरती सिंगार हो तुम
कृतक अँजान डगर की पहली मोहब्बत दिली एतबार हो तुम
चाँदनी के शबनमी मोतियों का
नवलखा मुक्ताहार हो तुम
सूरज की नव लालिमा कुदरत का प्यार हो तुम
मेरी दिली ख्वाहिश यार दिली एतबार हो तुम

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव