Sunday, 19 June 2016

हेरि मैं तो पृेम दीवाणी -३

जर्रे जर्रे में तेरा ही दीदार करते हैं
तुम्हारी बाँसुरियाँ की मनभावन धुन पे एतबार करते हैं
कुदरत की हरेक संय में "साँवरियाँ" तेरा दीदार करते हैं
इस कलयुग में एक मात्र आस तुम्ही हो कन्हैया एतबार करते हैं

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव