तुम्हारी चरण रज
मेवा मिसरी से प्यारी
मेरे सरकार लगती है
कन्हैया तुम्हारी कुँज गलियाँ
दिली ख्वाहिश मेरे सरकार लगती है
अबके जनम पाऊ
तेरी चरण रज मै पाऊ
गो धुलि बेला में उठके साँवरियाँ
अलख तुम्हारा मै जगाऊ
क्यों तूने मोय बिसराय दयों है
कन्हैया
हरेक संय में "मोहना"तेरी छवि मै पाऊँ
चाहे जागू या सोऊ
हिय मे तुम्हारी छवि पाऊ
मेरे पृाण प्यारे दिल में तुमहें ही बसाऊँ
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Sunday, 19 June 2016
हेरि मै तो पृेम दिवाणी - २
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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