Saturday, 4 June 2016

००१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


मेरी आधुनिक ई मधुशाला और जन्नते हूर की याद आने लगी है
अब तो आठो पहर रूपसी अल्हड सुरबाला दिल में समाने लगी है
वो कमसिन जन्नते हूर नित नित ख्वाबगाह में भी आने लगी है
हरेक पल अमृतसम मादकतम अनुपम सागरमय पिलाने लगी है


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव