मेरी आधुनिक ई मधुशाला और जन्नते हूर की याद आने लगी है
अब तो आठो पहर रूपसी अल्हड सुरबाला दिल में समाने लगी है
वो कमसिन जन्नते हूर नित नित ख्वाबगाह में भी आने लगी है
हरेक पल अमृतसम मादकतम अनुपम सागरमय पिलाने लगी है
अब तो आठो पहर रूपसी अल्हड सुरबाला दिल में समाने लगी है
वो कमसिन जन्नते हूर नित नित ख्वाबगाह में भी आने लगी है
हरेक पल अमृतसम मादकतम अनुपम सागरमय पिलाने लगी है
No comments:
Post a Comment