Saturday, 4 June 2016

००२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



तेरे हातो हाला पीकर झूम उठा चंचल मन मतवाला
यु लगा रूपसी जैसे तुमने अमृत रस पिला डाला
पहला अधिकार कृतक का प्रियतम फिर पाएगा फेरी वाला
तेरे द्वारें बीती रात से खड़ा है कृतक अंजान डगर निराला 

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव