Thursday, 7 July 2016

१५३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



मेरी आधुनिक मधुशाला में आके परदेशी अपना खुद को भुलाते
मदहोशी के आलम में होश में आना और जाना तक भुलाते
मेरी मधुशाला के चौबारे धुनि रमाते सदा सदा को बस जाते
अलख जगाते प्यार लुटाते मोहब्बत पाते होश गंवाते मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव