२३५- मेरी आधुनिक मधुशाला
पहला पहला अधिकार हमारा फिर जहां पायेगा मादक हाला
बनबाला अब हूर हमारी उससे चहकती मेरी आधुनिक मधुशाला
मैं कृतक अंजान डगर सदियों से प्यासा आज पियूँगा मादक हाला
तन मन सहित रूह तक झूम उठेगी मधुशाला में नचेगा कृतक मतवाला
पहला पहला अधिकार हमारा फिर जहां पायेगा मादक हाला
बनबाला अब हूर हमारी उससे चहकती मेरी आधुनिक मधुशाला
मैं कृतक अंजान डगर सदियों से प्यासा आज पियूँगा मादक हाला
तन मन सहित रूह तक झूम उठेगी मधुशाला में नचेगा कृतक मतवाला
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