Wednesday, 13 July 2016

सुहानी रात आने दे

सुहानी ऱात आने दे
बसंत को पंख फैलाने दे
कोयल को नग्में मोहब्बत के सुनाने दे
कुमुदनी को जरा मुस्कुराने दे
पपीहे को पीहू पीहू की रट लगाने  दे
भँवरों को उपवन में गुनगुनाने दे
महबूब को कसमसाने निभाने  दे
तेरे गाँव डगर कों महकने दे
चिडियों को चहकने दे
मैं एक दिन तेरे नाल आउँगा
नग्में मोहब्बत के गुनगुनाउँगा
अपनी बाहो में भरके मोहब्बत लुटाऊँगा 
तेरी मोहब्बत में जियूँगा 
तेरी मोहब्बत में मर जाऊँगा 
वादा करता हूँ 
जान देकर निभाऊँगा 
मोहब्बत की डगर पे जान की बाजी लगाऊंगा 
इबादत है मोहब्बत 
दिल से करके दिखाऊँगा 
कृतक अंजान मोहब्बत रास आएगी 
सभी कहते है यारो एक दिन हसीना मान जायेगी 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव