जब तक शांत नहीं होती मेरे अंतरमन की ज्वाला
जब तलक भरत नहीं दिल पीके तेरी मादक हाला
तब तलक नहीं छोडूंगा मैं परदेशी मेरी मधुशाला
दिल जिगर और जान बनी अब बाला की मादक हाला
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
No comments:
Post a Comment