Sunday, 17 July 2016

२३२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



पुण्य है पीना नित भोर में सागरमय अनुपम दिव्य अनुपम प्याला
भाग्यशाली व्यक्ति नित चलके आते अंजान डगर मेरी मधुशाला
जनम जनम के पाप आकर कटते एक बार झुका सिर मेरी मधुशाला
अगला जनम बृह्म कुल है पाता जो नित उठ भोग लगाता मादक हाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव