Sunday, 17 July 2016

२३३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



नहीं कोई दोष नज़र मुझको है आता पीने में सागरमय हाला
गुणों की खान है सागरमय हाला अमृतसम अनुपम मेर यारों
जिस्म के रक्षा तंत्र को मज़बूत बनाती कमसिन बाला की हाला
चाहे कितना ही दुःखी कोई हो सारे गम भुला देता मादक प्याला 

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव