Sunday, 17 July 2016

२३४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



एक गुज़ारिश सरकार से करता मई कृतक अंजान मेरी मधुशाला
हरेक कैदखाने में भी होनी चाहिये एक अदद आधुनिक मधुशाला
कमसिन विश्वमोहिनी रुपसी जहां नित पिलाती हो अनुपम हाला
सांझ ढले महफ़िल नित सजे और झूम उठे पीनेवाला मादक हाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव