Sunday, 17 July 2016

२३५ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



उदर की प्यास है बढती ही जाती जितनी मैं पीता सागरमय हाला
कभी न पीकर दिल ही भरत रूपसी सुरबाला की यौवन रस हाला
यौवन रस हाला बहुत ही मादक चौबीसों घंटे लबों से लैब ना हटते
मेरी आधुनिक मधुशाला बहुत मनोहर मनोरम जी भर पीते हाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव