Sunday, 17 July 2016

२३६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


नित सांझ ढले हूक सी दिल में उठती नज़र आती डगर मधुशाला
चुम्बक सा आकर्षण बल जिसमें जन्नते हूर कमसिन  सुरबाला
सारा ज़माना कदम चूमता और नित शीश झुकाता मेरी मधुशाला
मेरी मधुशाला चहक उठती मेरी मद्दुशाला में कदम रखती सुरबाला  

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव