Sunday, 17 July 2016

२३७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



जिन पथ हरेक मोड़ हरेक डगर तुम पाओगें मेरी मधुशाला
नित साँझ सबेरे डगर निहारेगी जन्नते हूर कमसिन बाला
आलौकिक आनंद जिंदगी में पाओगे गर आओगे मधुशाला
बाला की दिव्य सागरमय से सतत टपकती अमृतसम हाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव