सुहानी शाम ढल चुकी
न जाने तुम कब आओगे
जमाने की हवाँ बदल चुकी
न जाने तुम कब आओगे
राह तकते तकते फिजा बदल चुकी
न जाने तुम कब आओगे
सुखी प्यासी धरती लिहाफ बदल चुकी
न जाने तुम कब आओगे
तेरी राह तकते तकते इन्तहा हो चुकी
न जाने तुम कब आओगे
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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