Thursday, 7 July 2016

१५६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


तू ना कर कंजूसी रूपसी बाला देने में सागरमय अमृतसम हाला
मुझको चाहिए मादक हाला दिव्य अनुपम आलौकिक प्याला
गर तू रूठ गई मुझसे कर बद्ध होके तुझको मनाऊँगा रूपसी बाला
तुझको खुश देख कर झूम उठेगी मेरी आधुनिक मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव