Wednesday, 6 July 2016

२४२- मेरी आधुनिक मधुशाला

२४२- मेरी आधुनिक मधुशाला

सागर मंथन का रत्न अनुपम बाला की सागरमय हाला
देव दानवों के हाथ मचलता दिव्य अनुपम मादक प्याला
पहले पहल निढाल असुर हुये मोहनी के कर से पीके हाला
बाद जमाने के मेरी मधुशाला सागरमय लाई रूपसी बाला 

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव