२४२- मेरी आधुनिक मधुशाला
सागर मंथन का रत्न अनुपम बाला की सागरमय हाला
देव दानवों के हाथ मचलता दिव्य अनुपम मादक प्याला
पहले पहल निढाल असुर हुये मोहनी के कर से पीके हाला
बाद जमाने के मेरी मधुशाला सागरमय लाई रूपसी बाला
सागर मंथन का रत्न अनुपम बाला की सागरमय हाला
देव दानवों के हाथ मचलता दिव्य अनुपम मादक प्याला
पहले पहल निढाल असुर हुये मोहनी के कर से पीके हाला
बाद जमाने के मेरी मधुशाला सागरमय लाई रूपसी बाला
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