Monday, 18 July 2016

२५४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


मुझे नज़र आता है प्रियतम हरेक घड़ी कनक सम प्याला
सतत छलकती तेरी सागरमय से अमृतसम सोमरस हाला
कभी न जी है भरता रूपसी चाहे कितनी ही पी जाऊ  हाला
दिल में उमंगें उठती है जब हाथ मेरे आती सागरमय हाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव