Monday, 18 July 2016

२५३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



तेरी सागरमय हाला पीने को तरसते सुर मुनि तपस्वी और ग्वाला
तेरी सोमरस अमृतसम मुझे भाति कमसिन हसीन रूपसी बाला
तेरे मादक लबों से अमृतसम हाला पीने की चाहत दिल में लिए
सदियों से हरेक हरेक जनम धरा पे आता बनके बनका ग्वाला
आज पियूँगा सागरमय मोहिनी तेरे मादक लबों से गाँव का ग्वाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव