Tuesday, 19 July 2016

२६१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


यम से यारी मैंने बनानी उसे मादक सागरमय हाला पिलानी
अमृतसम साथ में लेकर जन्नत में मेरी मधुशाला बनानी
सांझ ढले महफ़िल में धूम धाम से सागरमय हमने पिलानी
मेरी मधुशाला की सागरमय की महक से जन्नत महकानी 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव