जो भी कोई आता है मेरी मधुशाला पीके हाला बहक जाता है
जब दीदार साकी का होता है तब परदेशी होशो हवास गंवाता है
अपनी मोहब्बत को दिल से याद करके प्याला परदेशी उठाता है
मेरे आधुनिक मयखाने में बड़े से बड़ा पीने वाला चकरा जाता है
जब दीदार साकी का होता है तब परदेशी होशो हवास गंवाता है
अपनी मोहब्बत को दिल से याद करके प्याला परदेशी उठाता है
मेरे आधुनिक मयखाने में बड़े से बड़ा पीने वाला चकरा जाता है
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