Wednesday, 20 July 2016

२६९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

जो भी कोई आता है मेरी मधुशाला पीके हाला बहक जाता है
जब दीदार साकी का होता है तब परदेशी होशो हवास गंवाता है
अपनी मोहब्बत को दिल से याद करके प्याला परदेशी उठाता है
मेरे आधुनिक मयखाने में बड़े से बड़ा पीने वाला चकरा जाता है


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव