Wednesday, 20 July 2016

२६८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


घूम घूम कर जाम पिलाती रूपसी बाला मेरी आधुनिक मधुशाला
सारे जहाँ से लोग है आते पिने सागरमय मादक हाला मेरी मधुशाला
नित साँझ ढले मेला सा लगता मधुशाला झुमती गाती रूपसी बाला
पीकर हाला झूमता गाता अलख जगाता परदेशी मेरी मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव