Tuesday, 19 July 2016

२६४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



बाला संग छुपा छाई खेलने में कृतक अंजान बहुत मज़ा आता
जब मधुशाला के उपवन में साकी बन काला मेघ धूम मचाता
सागरमय मादक हाला की सुनामी में जल थल एक हो जाता
काले मेघ की ओट में यारों कृतक अंजान बाला संग रास रचाता 

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव