Tuesday, 19 July 2016

२६३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

मेरे प्याले में जाने कब से ठुमक रही अमृतसम मादक हाला
जुबां लालायित कबसे यारों चखने को स्वाद अनुपम निराला
हाला की मादक मौजे जब प्याले के साहिल से यारों टकराती
यकीन कृतक अंजान का मानों दिल में सूनामी भूचाल है लाती  

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव