Saturday, 16 July 2016

महबूब की मेहंदी रंग लाती है, सूनी हथेली को कुर्बान होके सजाती है

हिना का दर्दे दिल गर कोई जान पाता
भूलके भी वो अपने हथेलियों पर हिना न लगाता

बडी बेदर्दी से शिलबट्टे पर मसली कुचली जाती है हिना
तब महबूब की हथेली पर रंग लाती है हिना


कई एक के सिर के बालों की रौनक बढाती है हिना
महबूब के पेरों को चार चाँद लगती है

महबूब की मेहेंदी से महकती है कायनातो फिजा
सूनी सूनी हथेलीं की रौनक बढाती है हिना

हिना तो हिना है हरेक हाल में रंग लाती है
अपनी मौन कुर्बानीं से कायनात महकाती है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव