Wednesday, 20 July 2016

२७१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



बाला की सागरमय अमृत हाला उंगलियों पे नचाती है दुनियाँ 
फिर भी रोज़ रोज़ मधुशाला के साये तले नज़र आती है दुनियाँ 
जन्नते हूर के हुस्न का दीदार करके दाँतो तले उँगली दबाती है दुनियाँ 
स्वर्ग से भी सुन्दर मन्दिर सम पावन मधुशाला नज़र आती है दुनियाँ  

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव