Wednesday, 20 July 2016

२७२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



जो भी परदेशी मेरी मधुशाला आता है होशो हवास गंवाता है
रूपसी सुरबाला की अमृतसम सागरमय हाला में गोते लगाता है
लाख कोशिश परदेशी है करता फिर भी संभलने नहीं पाता है
एक बार जो पी लेता है अमृतसम हाला वो फिर लौट के आता है  

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव