Friday, 22 July 2016

बेटियों से ही है ये जहाँ

बेटियों से है ये जहाँ
जमीं तो जमीं आसमान
जननी है कल की
इन्हीं का है आसमान
मोहब्बत कीजिये इनसे
ये ही तो है ममता की खान
स्वर्ग है इनसे
इन्ही कायतान की शान
जननी है ये
आदमियत की खान

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव