Thursday, 7 July 2016

१५० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


छुआ छूत का भेद मिटाती सबको एक जगह पे लाती
एक ही प्याले में सब मिलकर पीते  अमृतसम हाला
सभी जाती धर्म के लोग एक साथ बैठ पीते मादक हाला
मंदिर- मस्जिद से भी पावन लगती मेरी आधुनिक मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव