छुआ छूत का भेद मिटाती सबको एक जगह पे लाती
एक ही प्याले में सब मिलकर पीते अमृतसम हाला
सभी जाती धर्म के लोग एक साथ बैठ पीते मादक हाला
मंदिर- मस्जिद से भी पावन लगती मेरी आधुनिक मधुशाला
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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