मेरी मृत्यु पर रोने वालों के नयनों से बहेगी सागरमय हाला
मेरी मौत पर कायनात रोयेगी और अम्बर से बरसेगी हाला
मेरी मौत पर गुल न खिलेंगे उपवन में ना ही भँवर जायेंगे
ना ही भोर मुस्काएगी ना ही पंक्षी नग्मे मोहब्बत के जायेंगे
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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