Wednesday, 13 July 2016

२११ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



मेरी मृत्यु पर रोने वालों के नयनों से बहेगी सागरमय हाला
मेरी मौत पर कायनात रोयेगी और अम्बर से बरसेगी हाला
मेरी मौत पर गुल न खिलेंगे उपवन में ना ही भँवर जायेंगे
ना ही भोर मुस्काएगी ना ही पंक्षी नग्मे मोहब्बत के जायेंगे 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव