नदियों की धारा कलकल छलछल न करेंगी मौन हो जायेगी
मेघों में कौंधेंगी बिजुरिया कारी कारी बदरिया अश्क बहायेगी
अम्बर लाल हो जायेगा पूनम का चाँद शबनमी अश्क बहायेगा
अम्बर के तारे टिम टिमायेंगे टूट टूट कर शोक मनाने जमीं आयेंगे
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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