Wednesday, 13 July 2016

२१२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



नदियों की धारा कलकल छलछल न करेंगी मौन हो जायेगी
मेघों  में कौंधेंगी बिजुरिया कारी कारी बदरिया अश्क बहायेगी
अम्बर लाल हो जायेगा पूनम का चाँद शबनमी अश्क बहायेगा
अम्बर के तारे टिम टिमायेंगे टूट टूट कर शोक मनाने जमीं आयेंगे 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव