सुहानी ऱात आने दे
कुमुदनी मुस्कुराने दे
बसंत को पंख फैलाने दे
महबूब को नग्में मोहब्बत के गाने दे
कोयल को नग्में मोहब्बत के दे
कुमुदनी को जरा मुस्कुराने दे
पपीहे को पीहू पीहू गाने दे
भँवरों को गुनगुनाने दे
महबूब को कसमसाने दे
तेरे गाँव डगर कों महकने दे
चिडियों को चहकने दे
मैं एक दिन तेरे नाल आउँगा
नग्में मोहब्बत के गुनगुनाउँगा
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Friday, 15 July 2016
सुहानी रात आने दे
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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