Friday, 15 July 2016

सुहानी रात आने दे

सुहानी ऱात आने दे
कुमुदनी मुस्कुराने दे
बसंत को पंख फैलाने दे
महबूब को नग्में मोहब्बत के गाने दे
कोयल को नग्में मोहब्बत के दे
कुमुदनी को जरा मुस्कुराने दे
पपीहे को पीहू पीहू गाने दे
भँवरों को गुनगुनाने दे
महबूब को कसमसाने दे
तेरे गाँव डगर कों महकने दे
चिडियों को चहकने दे
मैं एक दिन तेरे नाल आउँगा
नग्में मोहब्बत के गुनगुनाउँगा

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव