और कितनी पियेगा तू परदेशी मेरी सागरमय मादक हाला
ना जाने कब प्यास बुझेगी उदर की अंजान डगर पीके हाला
आगे बढाकर दिल से हाला पिलाती कमसिन रूपसी सुरबाला
मेरे लिए चौबीसों घंटे राह निहारती मेरी आधुनिक मधुशाला
ना जाने कब प्यास बुझेगी उदर की अंजान डगर पीके हाला
आगे बढाकर दिल से हाला पिलाती कमसिन रूपसी सुरबाला
मेरे लिए चौबीसों घंटे राह निहारती मेरी आधुनिक मधुशाला
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