Wednesday, 27 July 2016

३०३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

और कितनी पियेगा तू परदेशी मेरी सागरमय मादक हाला
ना जाने कब प्यास बुझेगी उदर की अंजान डगर पीके हाला
आगे बढाकर दिल से हाला पिलाती कमसिन रूपसी सुरबाला
मेरे लिए चौबीसों घंटे राह निहारती मेरी आधुनिक मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव