मन की निराशा पल में हर लेती बाला की सागरमय हाला
तिमिर के मेघ पलक झपकते छटते देख मेरी मधुशाला
गम कोषों दूर हो जाता यारों देख कमसिन हुस्न मतवाला
जिन्दगानी में नित नव अरमाँ जगाती मनोहर मधुशाला
तिमिर के मेघ पलक झपकते छटते देख मेरी मधुशाला
गम कोषों दूर हो जाता यारों देख कमसिन हुस्न मतवाला
जिन्दगानी में नित नव अरमाँ जगाती मनोहर मधुशाला
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