Wednesday, 27 July 2016

३०२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

मन की निराशा पल में हर लेती बाला की सागरमय हाला
तिमिर के मेघ पलक झपकते छटते देख मेरी मधुशाला
गम कोषों दूर हो जाता यारों देख कमसिन हुस्न मतवाला
जिन्दगानी में नित नव अरमाँ जगाती मनोहर मधुशाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव