मेरी मधुशाला में महफ़िल नित सजती रोज़ ही पीता हाला
कंचन सम अनुपम प्याले में रूपसी देती सागरमय हाला
रोज़ सोचता दिल में अपने अब यह होगा आखिरी प्याला
साँझ ढले नित मुझे पुकारती सी लगती बाला और मधुशाला
कंचन सम अनुपम प्याले में रूपसी देती सागरमय हाला
रोज़ सोचता दिल में अपने अब यह होगा आखिरी प्याला
साँझ ढले नित मुझे पुकारती सी लगती बाला और मधुशाला
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