Wednesday, 27 July 2016

२९९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

 मैंने यारो सदा ही पाई अपनी चाहत की सी अनुपम हाला
साँझ ढले मैं नित समय पे आता शीश झुकाता मधुशाला
कमसिन की सागरमय पीकर करार यार दिल को आता
मेरे दिल जानो जिगर में बसती एक ही मूरत सुरबाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव