मैंने यारो सदा ही पाई अपनी चाहत की सी अनुपम हाला
साँझ ढले मैं नित समय पे आता शीश झुकाता मधुशाला
कमसिन की सागरमय पीकर करार यार दिल को आता
मेरे दिल जानो जिगर में बसती एक ही मूरत सुरबाला
साँझ ढले मैं नित समय पे आता शीश झुकाता मधुशाला
कमसिन की सागरमय पीकर करार यार दिल को आता
मेरे दिल जानो जिगर में बसती एक ही मूरत सुरबाला
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