Wednesday, 27 July 2016

३०० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

 सुरबाला की हाला पीकर शांत न होती अंतर्मन की ज्वाला
कभी न ना ही कहता परदेशी मादक अमृत हाला पीनेवाला
रोज़ सोचता अब ना पियूँगा और न मैं आऊँगा मेरी मधुशाला
लेकिन साँझ ढले नित याद सताती कमसिन बाला की हाला    

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव