शान से पिता हूँ शान से जीता हूँ नित आके मेरी मधुशाला
जिन्दगी जीने की उमंग बढ़ाती सुरबाला की सागरमे हाला
सुखद अहसास रूह तक पाती आके मेरी आधुनिक मधुशाला
कृतक अंजान डगर संनिग्ध में अलख जगाती रूपसी बाला
जिन्दगी जीने की उमंग बढ़ाती सुरबाला की सागरमे हाला
सुखद अहसास रूह तक पाती आके मेरी आधुनिक मधुशाला
कृतक अंजान डगर संनिग्ध में अलख जगाती रूपसी बाला
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