Sunday, 24 July 2016

२८८ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ


तेरे मयखाने परदेशी आता तेरे लबो से छलकती अमृतसम हाला 
दिल मचलने लगता है दीदार यार को ए रूपसी कमसिन बाला 
इतनी पीलादे साकी मुझकों कभी होश में न आये मनोहर ग्वाला 
गमे जिंदगी से निजात पाने को रोज़ मधुशाला आता ग्वाला मतवाला 


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव