Friday, 29 July 2016

३०४ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

पञ्च तत्व से रची ये माया और तीन तत्वों से बनाई हाला
तीन अमूल्य तत्वों हाला बाला और दिव्य अनुपम प्याला से
कृतक अंजान डगर मनोहर ने रच डाली मेरी आधुनिक मधुशाला
जन्नते हूर कमसिन बाला की मोहब्बत में कृतक ने पी आज हाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव