Saturday, 30 July 2016

३०७ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ



कभी कभी बाला की सागरमय हाला का चमत्कार देखने में आता है 
बाला की अमृतसम सागरमय मादक हाला पीके बूढ़ा जवाँ हो जाता है 
सावन की रिमझिम फुहारों के बीच सागरमें का नशा रंग लाता है 
कमसिन के अमृत हाला दिल को भाती है हरेक संय में वो नज़र आती है 



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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव