Saturday, 30 July 2016

३०९ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

 कभी कभी ऐसा हो जाता है पैमाना हाथ से फिसल जाता है
अनुपम पैमाना फर्श पे गिरकर चूर चूर मेरे यार हो जाता है
सच पूछिये तो यारों पैमाने के साथ साथ दिल टूट जाता है
जितनी पिलाई थी सागरमय उसने नशा पल में काफूर हो जाता है


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव