मयखाने में सदियों से आता फिर भी कृतक प्यासा रह जाता
रोज़ ही मिलती रूपसी प्रियतम कर में लेकर सागरमय हाला
सदियों से मोहब्बत मेरी प्रियतम और मेरी आधुनिक मधुशाला
दिल में बसी प्रियतमा मेरी मोहब्बत कमसिन साकी सुरबाला
रोज़ ही मिलती रूपसी प्रियतम कर में लेकर सागरमय हाला
सदियों से मोहब्बत मेरी प्रियतम और मेरी आधुनिक मधुशाला
दिल में बसी प्रियतमा मेरी मोहब्बत कमसिन साकी सुरबाला
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