Saturday, 30 July 2016

३१० - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

मयखाने में सदियों से आता फिर भी कृतक प्यासा रह जाता
रोज़ ही मिलती रूपसी प्रियतम कर में लेकर सागरमय हाला
सदियों से मोहब्बत मेरी प्रियतम और मेरी आधुनिक मधुशाला
दिल में बसी प्रियतमा मेरी मोहब्बत कमसिन साकी सुरबाला 

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव