Sunday, 24 July 2016

२८६ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

 
सावन के सुहाने मौसम में झूला झूलती रूपसी बाला मेरी मधुशाला
बसन्ती बहारो ने मेरी मधुशाला की कायनातो फ़िज़ा को बदल डाला
जो शाम गुजरी साकी सुरबाला के संग पीकर अमृतसम मादक हाला
जिन्दगानी की महकती शाम थी वो जब बाला के लबो से मादक हाला



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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव