कोयल की कुहुक मतवाली मोरों की रागिनी सुहानी सी लगती हाला
सावन की मादक फुहारों में जन्नते हूर हमें लगती कमसिन बाला
आमों की मञ्जरी की मादक महक लगती जैसे महुये की अमृत हाला
सावन के सुहाने मौसम में पपीहे की पीहू पीहू लगती ज्यों बाला की छलकती हाला
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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