सावन के सुहाने मौसम में करार दिल को आता है पीकर तेरी मादक हाला
परदेशी के दिल को चेन आता है सनम आकर तेरे आधुनिक मयखाने में
मदहोश शाम मदमस्त शाम मेघो का मोहब्बत में झुकना मेरे मयखाने पे
लहराती बल खाती मस्त हवा जब मधुशाला से गुज़री चुनरी उड़ाई बाला की
४
No comments:
Post a Comment