Saturday, 23 July 2016

२८२ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

मेरी मधुशाला में महुये की मादक हाला का नशा रंग लाता है
बाला की सागरमय पीके परदेशी झूम झुमके ठुमके लगाता है
मचलती है कमसिन जवानी मेरी मधुशाला में खुमार छाता है
होती है सप्तरंगी हसी राते मेरी मधुशाला में, दीवाना गीत गाता है


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव