Saturday, 23 July 2016

२८३ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

जाने क्यों लोग सागरमय अमृतसम मादक हाला पीने से डरते है
हम परदेशी तो रूपसी बाला की हाला से बेपनाह मोहब्बत करते हैं
बिन सुरबाला की मादक हाला के जीने की कल्पना से भी डरते हैं
मेरी मधुशाला में सरेशाम आकर सजदे में नाक तक रगड़ते है  

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव