तेरे मयखाने में जब भी कभी आता हुँ जन्नत का शुकुन पाता हुँ
मदहोशी के आलम में जमाने भर के रिश्ते नाते यारों भुलाता हुँ
सरेशाम बाला की महफ़िल में अमृतसम हाला में डुबकियाँ लगाता हुँ
मेरी मधुशाला में झूमता हू पी बाला की हाला जीवन का मज़ा पाता हुँ
मदहोशी के आलम में जमाने भर के रिश्ते नाते यारों भुलाता हुँ
सरेशाम बाला की महफ़िल में अमृतसम हाला में डुबकियाँ लगाता हुँ
मेरी मधुशाला में झूमता हू पी बाला की हाला जीवन का मज़ा पाता हुँ
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