Saturday, 23 July 2016

२८१ - मेरी आधुनिक मधुशाला / મેરી આધુનિક મધુશાલા / মেরি আধুনিক মধুশালা /meri aadhunik madhushaalaa / ਮੇਰੀ ਆਧੁਨਿਕ ਮਧੂਸ਼ਾਲਾ

 तेरे मयखाने में जब भी कभी आता हुँ जन्नत का शुकुन पाता हुँ
मदहोशी के आलम में जमाने भर के रिश्ते नाते यारों भुलाता हुँ
सरेशाम बाला की महफ़िल में अमृतसम हाला में डुबकियाँ लगाता हुँ
मेरी मधुशाला में झूमता हू पी बाला की हाला जीवन का मज़ा पाता हुँ


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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव